कलेक्ट्रिएट कांड की प्राथमिकी में पुलिस लाठीचार्ज की चर्चा नहीं

कलेक्ट्रिएट कांड की प्राथमिकी में पुलिस लाठीचार्ज की चर्चा नहीं

By: Abhijna verma
January 09, 09:01
0
BHAGALPUR : कलेक्ट्रिएट परिसर में जन संसद के अनशनकारियों पर 8 December पुलिस ने जमकर लाठियां चलाई थी। परंतु FIR में लाठीचार्ज की चर्चा तक नहीं की है।

दंडाधिकारी ने अपने बयान में अन्य घटना का जिक्र तो किया है। पर कलेक्ट्रिएट परिसर में महिलाओं पर लाठीचार्ज की चर्चा तक नहीं की है। धरनास्थल पर दंडाधिकारी के तौर पर ड्यूटी कर रहे जय प्रकाश चौधरी के बयान पर प्राथमिकी दर्ज की गयी है।

दंडाधिकारी चौधरी ने वहां ड्यूटी पर तैनात पुलिस अधिकारी और गृह रक्षकों का नाम लिखा है। उनका कहना है कि अनशन पर बैठे लोगों की संख्या दोपहर लगभग डेढ़ बजे अचानक से तीन-चार सौ हो गयी। इनमें 200 महिलाएं थीं।

उन्होंने अनशनकारियों द्वारा उत्तरी गेट को तोड़ कर डीएम कार्यालय की तरफ बढ़ने की बात कही है। डीएम के गोपनीय और सामान्य कार्यालय में उनके घुस जाने, सरकारी काम में बाधा डालने के बाद दंडाधिकारी ने वरीय अधिकारी को घटना की जानकारी दी और उनकी मदद के लिए अतिरिक्त बल वहां भेज दिया गया। उन्होंने भीड़ पर पुलिसकर्मियों पर पत्थरबाजी करने का आरोप लगाया। पत्थरबाजी की वजह से भगदड़ होने और उस दौरान महिलाओं के गिर जाने से उन्हें चोट आने की बात का उल्लेख किया है।

उकसाने पर दोबारा भीड़ के उग्र होने और उनके द्वारा पत्थरबाजी करने पर कई प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी के घायल होने की बात तो दंडाधिकारी ने लिख दिया है। पर कहीं भी बुजुर्ग महिलाओं पर लाठीचार्ज की बात उन्होंने नहीं लिखी। घटना में बुरी तरह जख्मी छह महिलाएं अभी भी जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल में भरती हैं। इससे यही लगता है कि घटनास्थल पर मौजूद दंडाधिकारी ने लाठीचार्ज के अलावा बांकी पूरी घटना देखी।

इस बात की आशंका व्यक्त की जा रही है कि सरकार को आधिकारिक रूप से भेजी जा रही रिपोर्ट में पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई को उचित बताया जायेगा। लेकिन वास्तविकता सरकार को भी पता चल चुकी है।

घटना की हो रही निंदा 

बक्सर सांसद अश्विनी कुमार चौबे, भाजपा नेता अर्जित शाश्वत चौबे ने भी इस घटना की निंदा की। उन्होंने बताया कि लोग अपने वाजिब हक को मांग रहे थे तो प्रशासन ने लाठी बरसायी। इंकलाबी नौजवान सभा की ओर से डीएम कार्यालय के सामने प्रदर्शन कर रहे आंदोलनकारियों को रिहा करने की मांग की गयी। सभा के राज्य सह-सचिव गौरीशंकर राय ने बताया कि गरीबों का हक मांगने पर लाठी मिलती है और जेल में डाल दिया जाता है।

मुख्य सचिव ने मांगी पूरी रिपोर्ट

कलेक्ट्रिएट परिसर में हुई घटना की मुख्य सचिव ने विस्तृत रिपोर्ट सीनियर प्रशासनिक अधिकारी से मांगी है। इस बात की गहराई से जांच की जा रही है कि लाठीचार्ज किस अधिकारी के आदेश पर हुआ। सरकार इस घटना के दोषियों को नहीं छोड़ेगी। तीन-चार दिनों में इस मामले में सरकार का रुख स्पष्ट होने की संभावना है।
 

हर ताज़ा अपडेट पाने के लिए के फ़ेसबुक पेज को लाइक करें।

comments
No Comments